मेरी मौत


मैं मर गया हूँ
मेरे घर मातमपुरसी के लिए
आनेवालों की भीड़ बढ़ती जा रही है

भीड़ में मेरे बेटे / बेटियाँ
नाते- रिश्तेदार / मित्रों की
आवाजाही बनी है.

में तलाशता हूँ शोक-संतप्त चेहरा
पर अधिकांश चेहरे पर बेचैनी है
अपनी उपस्थिति दर्शाने की.
हड़बड़ी है उन्हें सिर्फ एक झलक दिखाकर
भाग जाने की

किसी-किसी की आँखें
बनावटी आँसुओं से तर है.

में हैरान हूँ देखकर भीड़
इतने लोगों की अपने घर में
क्योंकि मैं तो अपने अकेलेपन में
करता रहा दीवारों से बातें

और आज मुक्त होकर
सुकून महसूस कर रहा हूँ.

मैं तो जिंदगी में
हर एक पल मरता रहा
पर दुनियां को दिखाने के लिए
मुस्कुराता रहा हूँ

हैरत में हूँ इसलिए कि
आज रोनेवाले
ताउम्र हमें रुलाते रहे हैं

छीनते रहे है चैन से मुझसे
जीने का अधिकार
आज दिखा रहे हैं एक-दूसरे को
अपने झूठे चेहरे.